MP NEWS: अपनी बेटी की बलि देने की पिता को चढ़ी सनक: वीडियो देख मां ने बचाया…

MP News : इंदौर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां 4 साल की बेटी की जान खुद उसके पिता ने लेने की कोशिश की। आरोपी बाप उसकी बलि देना चाहता था। उसने इसका VIDEO भी बनाया। आरोपी की मां ने इस बात की जानकारी अपनी बहू को दी। जिसके बाद बच्ची को बचाया गया।

बैतूल में अपने मायके में रह रही आरोपी की पत्नी को जैसे ही इस बारे में पता चला, उसने फोन कर तुरंत अपने जेठ जेठानी को घर भेजा। फिर उन्हीं ने पुलिस बुलाई और पागलों जैसी हरकतें कर रहे आरोपी पिता से बेटी को छुड़वाया। अब पिता मेंटल हॉस्पिटल में है और बेटी परिवार के पास…।

ऐसा क्यों हुआ, जानिए बच्ची की मां अनिता शक्तावत की जुबानी..

बच्ची की मां अनिता ने बताया- इंदौर में छुटपुट काम धंधा करने वाला मेरा पति देवेश शक्तावत कुशवाह कॉलोनी में रहता है। वह कुछ समय पहले एक हादसे में मरते-मरते बचा था। तब उसने यह मन्नत ली कि यदि बच गया तो मुर्गे-मुर्गी की बलि देगा ।

बैतूल में उसने परंपरानुसार बलि दे भी दी। फिर अचानक उसका दिमागी संतुलन बिगड़ गया और वो बहकी-बहकी बातें करने लगा। कहता था कि और बलि देना है अभी। यह सुनकर मैं घबरा गई।

मैं घबराकर उसे अपने मायके बैतूल में ही रखने लगी। चार साल की बेटी भी साथ थी। पर अचानक एक दिन पति बोला कि इंदौर जा रहा हूं। बेटी को भी साथ ले गया। तब सब ठीक था।

तीन दिन पहले पता चला कि वह बेटी की बलि देने जा रहा है। इसका पता भी उसकी सनकभरी बातों से चला। उसने एक वीडियो बनाया जिसमें बेटी को ड्रम में पानी में लटका रहा था। उसे चार घंटे तक लटकाए रखा और फिर बाहर निकालकर पूरा भिगोकर जमीन पर लेटा दिया।

यह खबर शुक्रवार को मेरी सास ने मुझे दी। जब यह बात मुझे वीडियो से पता लगी तो मैंने तुरंत इंदौर में ही रहने वाले जेठ, जेठानी को बताया। वे पहुंचे तो देखा कि वह चाकू लिए खड़ा था, बेटी कोने में बेसुध लेटी थी। पुलिस को बुलाकर सिरफिरे से बच्ची को छुड़ाया गया। फिलहाल उसे मेंटल हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है। उसे दिमागी दौरा पड़ने की बीमारी है।

इसी हफ्ते परिवार के साथ मायके गई थी महिला

अनिता के मुताबिक वह इसी हफ्ते ही पति और बच्ची के साथ अपने मायके बैतूल आई थी। बुधवार को बैतूल से कुछ दूर गांव में उन्होंने एक मंदिर में देवेश के लिए पूजा-पाठ कराया और मुर्गा-मुर्गी की बलि दी। इसी कड़ी में पति देवेश पर फिर एक और बलि देने का जुनून सवार हो गया और बहकी-बहकी बातें करने लगा।

एक और बलि के लिए करने लगा मंत्रोच्चार

अनिता ने बताया पति हाथ में सवई (दाने लेकर मंत्रोच्चार) करने लगा। फिर उसने जोर-जोर से कहना शुरू किया कि मुझे एक बलि और देनी है, साथ ही अंधविश्वास संबंधी बातें करने लगा। फिर थोड़ा सामान्य होकर वापस वैसी ही बहकी-बहकी बातें करने लगा। इस पर परिवार के लोग उन्हें मेरे मायके लेकर आए।

गुरुवार को उन्होंने कहा कि मैं इंदौर जा रहा हूं और बेटी अंबिका को भी अपने साथ ले गए। उधर, इंदौर पहुंचने के बाद फिर वे उल्टी-सीधी हरकतें करने लगे। उन्होंने शुक्रवार शाम को बच्ची को पानी से भरे ड्रम आधा डुबो दिया। इसकी जानकारी मुझे सास प्रेमलता व आसपास के लोगों से मिली। मैंने अपने जेठ-जेठानी श्याम व वंदना को फोन कर सूचना दी।

जेठ-जेठानी ने बच्ची को बचाया

जेठ-जेठानी ने मौके पर पहुंचकर देवेश को समझाने व रोकने की कोशिश की, लेकिन वह पागलों जैसी हरकतें करने के साथ हिंसक हो गया। इस पर पुलिस को सूचना दी तो वह मौके पर पहुंची। मामले में पुलिस ने बच्ची को जेठ-जेठानी के सुपुर्द कर दिया।

कुछ देर बांधकर रखना पड़ा, अब मेंटल अस्पताल में एडमिट शिकायत मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने परिवार से कहा कि यह पागलों जैसी हरकतें कर रहा है इसलिए उसे मेंटल अस्पताल ले जाना ठीक होगा। इस बीच सामाजिक सेवा से जुड़ी संस्था सुल्ताने इंदौर एकता समिति और महाकाल मानव सेवा के जयु जोशी, करीम खान, प्रियांशु पांडे, नफिरोज पठान, आदर्श गंगराडे व पंकज कटारिया भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोपी पिता को पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह बार-बार अनियंत्रित हो रहा था।

इस बीच वह घर से बड़ा त्रिशूल लेकर आ गया और बाहर हंगामा करने लगा। काफी मशक्कत के बाद सभी ने मिलकर उसे पकड़ा और बांधा। इस बीच टेली मानस हेल्पलाइन के नंबर पर सूचना दी गई तो वहां से भी सदस्य मौके पर पहुंचे और उसे मेंटल हॉस्पिटल ले गए। यहां भी वह काफी गुस्से में आकर अनियंत्रण हो रहा था।

प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उसकी मानसिक हालत बेहद खराब है इसलिए उसे एडमिट कराना होगा। अगले दिन पत्नी अनिता इंदौर पहुंची तो बच्ची की सर्दी के कारण हालत ठीक नहीं थी। फिर वह मेंटल अस्पताल पहुंची तो डॉक्टरों ने बताया कि अभी वह पति से नहीं मिल सकती क्योंकि अभी भी उसका रवैया काफी हिंसक बना हुआ है। साथ ही यह भी बताया कि इलाज लंबा चलेगा।

घटना के बाद परिवार की नींद उड़ी, सहमी हुई है मासूम बच्ची पत्नी ने बताया कि दो साल पहले भी पति को ऐसा दिमागी दौरा पड़ा था तो उसने इलाज करवाया था और वह ठीक हो गया था। फिर कभी उसमें ऐसे लक्षण नहीं दिखे। दो साल बाद अचानक उसके इस रवैये से परिवार की नींद उड़ी हुई है जबकि मासूम बच्ची सहमी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक मेडिकल में इस बीमारी को बाय पोलर मूड डिसऑर्डर कहते हैं। इसकी दवाइयां नियमित नहीं लेने पर या किसी प्रकार के माहौल से उसे फिर ऐसे दौरे पड़ सकते हैं। अस्पताल के डीन डॉ. संजय दीक्षित के मुताबिक इस तरह के मामले आने पर टेली मानस हेल्पलाइन नं. 14416 या 1800-8914-416 पर फोन कर फ्री काउंसिलिंग के बारे में पूछा जा सकता है।