Betul News : खुदख़ुशी से पहले बास्केटबॉल प्लेयर के वो अंतिम शब्द…जिसने पढ़ा रो दिया…

Betul News:अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी ने बांध में कूदकर की आत्महत्या इससे पहले उन्होंने परिवार के सदस्यों को वॉयस मैसेज भेजे। इंदौर मल्टी फायर कांड में अपने भाई की मौत के बाद से वह डिप्रेशन में थी।

मामला बैतूल का है। कोतवाली एएसआई अवधेश शर्मा ने बताया कि प्रार्थना साल्वे (17) बुधवार शाम को घर से प्रैक्टिस के लिए ग्राउंड जाने की बात कहकर निकली थी। रात करीब 9 बजे परिजनों ने उसका वॉयस मैसेज देखा। इसमें उसने कोसमी बांध में कूदकर आत्महत्या करने की बात कही थी। वॉयस मैसेज सुनने के बाद परिजन देर रात तक उसकी तलाश करते रहे, लेकिन उसका पता नहीं चला। प्रार्थना के पिता शिक्षक हैं।

डैम के पास लावारिस हालत में मिली स्कूटी
इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। गुरुवार की सुबह फोरलेन स्थित कोसमी बांध के पास लावारिस हालत में एक स्कूटी खड़ी मिली. यह प्रार्थना की गई। इसके बाद पुलिस ने होमगार्ड व एसडीआरएफ के जवानों की मदद से बांध में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. करीब दो घंटे बाद उसका शव मिला। इंदौर मल्टी फायर कांड में बेटे की मौत के बाद बेटी की आत्महत्या से पूरा परिवार सदमे में है.

खिलाड़ी बेटी का वो आखिरी संदेश जो वोईस मेसेज भेजा था पढ़िए आप शब्दों में

नम आखो से परिवार को मोबाईल पर Voice Message भेजा….

मम्मी पापा ……..मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है, मेरे से अब हो नहीं पा रहा है। मैं कितना भी ट्रॉय कर लूं, मेरे से नहीं हो रहा। मैं सोच रही थी, सबकुछ अच्छे से वापस करूं, पर नहीं हो पा रहा था। मैंने बहुत ट्रॉय किया। मैं सोच रही थी, सबकुछ हटा दूंगी। कोई बात नहीं इतना तो चलता है। सब पहले जैसा हो जाएगा, थोड़ी सी लग गई तो क्या…। कब से अपने आप को अंदर ही अंदर सही करने का ट्रॉय कर रही हूं, लेकिन नहीं हो रहा है। बहुत ट्रॉय किया नहीं हुआ। अब नहीं देखा जाता, घर में जो झगड़े होते हैं। भले ही वो छोटे-छोटे हों, पर अब नहीं देखा जाता मुझसे। मेरे से नहीं होगा अब। जीने से डर लगने लगा है। मेरे से हो ही नहीं पाएगा। छोटी-छोटी दिक्कतों को देखकर ऐसा लगाता है, जैसे कितनी बड़ी दिक्कत आ गई, अब मैं कैसे करूं। मुझसे नहीं हो रहा है। भैय्या का हुआ… अंदर ही अंदर रोई। आज तक किसी के सामने अच्छे से रोई तक नहीं। उसके बाद घर में बात नहीं करती थी तो सबको लगता था अपने में रहती है, बहुत ज्यादा सेलफिश है। इसे कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसा नहीं था, मैं उस चीज को अवाइड करना चाहती थी, ताकि मुझे रोना नहीं आए। मैं कमजोर नहीं दिखूं। मैंने बहुत ट्रॉय किया। अभी तक लगता है भैय्या मेरी वजह से चला गया। मुझे माफ कर दाे, मेरे से नहीं होगा। सॉरी, अब नहीं होगा।

मैं रोज सोचती थी, ठीक है कुछ नहीं होता, फिर सबकुछ आ जाएगा। पहले जैसा सब हो जाएगा। सब नाॅर्मल हो जाएगा। न कोई झगड़ा न कोई लड़ाई घर में होगी। मैं भी अपना गेम खेलने लगूंगी। पर ऐसा नहीं हो पाया। अंदर ही अंदर मर गई हूं। कब से सोच रही थी कि सबकुछ खत्म कर दूंगी, पर कर नहीं पाई। डेली सोचती थी कि एक चांस खुद को दे दूं। अब सबकुछ सही हो जाएगा। वापस खेलने जाऊंगी तो लाइफ नॉर्मल लगेगी। मुझे सब काेई माफ कर दो, अब नहीं हो पाएगा। प्लीज नहीं होगा, सॉरी… सब बाेलते थे तू जल्दी आ जा, सब लोग तेरा वेट कर रहे हैं। तुझे फिर से खेलते देखना चाहते हैं। मैंने बहुत ट्रॉय किया, डेली सोचती थी कि अब करूंगी, लेकिन पूरा मन मर जाता था।

जब सर ने बुलाया तो मैं रेडी हो गई। एक दो दिन में चली जाऊंगी, वहां जाकर ठीक हो जाऊंगी। पता नहीं फिर मन मर गया मेरा। कल पापा ने पूछा- कब जा रही है। मेरे पास कोई जवाब नहीं था। मुझे पता ही नहीं करना क्या है। शांत रहने का मतलब यह नहीं मैं ठीक हूं। मेरे दिमाग में क्या चल रहा है, वह भी तो कभी पूछना था न सबको। एक बार तो बिठा के अच्छे पूछ लेते, गुडिया क्या हुआ, इतनी चुप क्यों है। मन नहीं है तो कोई बात नहीं है। कैसे बोलूं मैं नहीं रो पाई थी। भैय्या था तो मैसेज करके पूछता था कि गुडिया कैसी है, खाना खाई की नहीं। मैं हॉस्टल में भी बताती थी कि पापा का मैसेज नहीं आता था, लेकिन भाई का मैसेज आता है, पापा का कभी नहीं… मेरे से नहीं होगा सॉरी… सॉरी मम्मी… मेरे से नहीं होगा… मुझे माफ कर दो।

भाई की मौत के सदमे से नहीं उबर पाया
सात माह पहले एक सिरफिरे प्रेमी ने इंदौर के स्वर्ण बाग कॉलोनी स्थित मल्टी में आग लगा दी थी। इसमें प्रार्थना के भाई देवेंद्र की मौत हो गई थी। भाई की मौत के बाद से प्रार्थना खामोश रहने लगी थी। बहन का नेशनल जूनियर बास्केटबॉल टीम में चयन हुआ था। भाई उसे बैतूल से दिल्ली ले गया था। यहां से लौटकर वह स्वर्णबाग कॉलोनी में रहने वाले अपने दोस्त गौरव से मिलने इंदौर गया और वहीं रहने लगा. इसी दौरान हादसा रात में हुआ। बताया जा रहा है कि प्रार्थना भाई की मौत के सदमे से उबर नहीं पा रही थी. वह लिगामेंट फटने से भी परेशान थी।

जॉर्डन एशिया कप खेलने गए थे
प्रार्थना के बास्केटबॉल कोच राकेश वाजपेयी ने बताया कि वह बहुत खुश हैं. वह एक अच्छी खिलाड़ी थी। उसने नाटक किया था

खेलो इंडिया के लिए भी हुआ था चयन
वह रशिया भी खेलने जा चुकी थी। प्रार्थना नेशनल विनर रही है। बेंगलुरु में हुए नेशनल टूर्नामेंट में वह एमपी की टीम से खेली थी। प्रार्थना का चयन ‘खेलो इंडिया’ के लिए भी हुआ था। जिसकी उसे स्कॉलरशिप भी मिलती थी।