Aditya L-1 सुलझाएगा सूरज का ये रहस्य! आखिर क्यों खास है ये मिशन

Aditya L-1 भारत का पहला सोलर मिशन है Aditya L-1 कल अपने मिशन पर निकलेगा। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसे दोपहर 11:50 मिनट पर लांच किया जाएगा। । इसके लिए Space Craft को तकरीबन 5 माह की यात्रा करनी होगी। जो धरती और सूरज के बीच स्थित L1 प्वाइंट पर पहुंचकर उन रहस्यों को खंगालेगा जिनके बारे में अब तक विश्व अनजान है। आदित्य एल-1 की लांचिंग के बाद उसके मंजिल तक पहुंचने के बीच तकरीबन चार माह का वक्त लगने की उम्मीद है।

चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO सूरज के रहस्य खंगालने के लिए आदित्य एल-1 लांच कर रहा है। इसका काउंटडाउन शुरू कर दिया गया है। यह इसरो का पहला सौर मिशन है, आदित्य एल-1 धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय करके धरती और सूरज के बीच स्थित L1 पॉइंट पर जाएगा और वहीं से 24 घंटे सूरज पर नजर रखेगा।

सूरज की परिक्रमा नहीं करेगा आदित्य एल-1

आदित्य एल-1, इसरो का यह स्पेस क्राफ्ट अंतरिक्ष में एक जगह स्थिर रहेगा। यह धरती से L1 प्वाइंट तक जाएगा, यह वो स्थान है जहां धरती और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बैलेंस है, इस जगह को लैंग्रेज प्वाइंट या हेलो कक्षा भी कहते हैं। विज्ञान की नजरिए से देखें तो दो पिंडो के बीच जिस स्थान पर गुरुत्वाकर्षण बैलेंस होता है वहां पर जो चीज पहुंचाई जाती है वह स्थिर हो जाती है। ऐसे में कम ईंधन की खपत के साथ ही आदित्य एल-1, लैंग्रेज प्वाइंट पर स्थिर रहेगा और वहीं से सारी जानकारियां इसरो के पास भेजेगा।

सफर पूरा करने में लगेंगे 125 दिन

इसरो चीएफ एस सोमनाथ के अनुसार आदित्य एल-1 को सफर करने में करीबन 125 दिन लगेंगे, इस बीच वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर बनाये रखेंगे।

श्री हरिकोटा से लांचिंग के बाद आदित्य एल-1 को धरती की निम्न कक्षा में पहुंचाया जाएगा और यहां धरती की परिक्रमा करने के बाद वह ऑर्बिट बदलेगा और ये सफर पूरा करने के बाद इसे धरती के गुरुत्वाकर्षण से बाहर L1 में इंजेक्ट किया जाएगा। यहां से ये L1 की हेलो कक्षा में पहुंचकर स्थिर हो जाएगा।

रहस्यमयी तारा है सूर्य

सूर्य को सौर मंडल का सबसे रहस्यमयी तारा माना जाता है, ओसामिया यूनिवर्सिटी की एस्ट्रोनोमी डिपार्टमेंट की चीफ शांति प्रिया ने समाचार एजेंसी से बातचीत में बताया कि सूर्य एक ऐसा तारा जिस पर सभी ग्रह निर्भर हैं। अब तक कई देश सोलर मिशन लांच कर रहे हैं, लेकिन भारत पहली बार ये करने जा रहा है, जो टर्निंग प्वाइंट साबित होगा, क्योंकि हम कुछ ऐसा करने जा रहे हैं जो हमने पहले नहीं किया।

चुनौतियां भी कम नहीं

Aditya L-1 कि राह में कई चुनौतियां हैं, पूर्व नासा साइंटिस्ट डॉ. मिला मित्रा ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में बताया कि आदित्य एल-1 लैंग्रेज पॉइंट पर जाएगा। यह पॉइंट स्टेबल होता है, इस जगह से आदित्‍य एल1 सूर्य पर लगातार नजर रखेगा, और इसका बड़ा चैलेंज वहां तक पहुंचना ही है, क्योंकि वहां का तापमान और रेडिएशन बहुत ज्यादा होता है. ऐसे में सूरज के ताप से बचाना सबसे पहली चुनौती है. इस मिशन की सफलता के साथ भारत भी ये दिखा देगा की टेक्नोलॉजी के मामले में वह किसी से पीछे नहीं है।

इन रहस्यों का पता लगाएगा आदित्य एल-1

पूर्व नासा साइंटिस्ट डॉ. मिला मित्रा के मुताबिक आदित्य एल-1 सूरज के सभी लेयर्स, सोलर वेदर, कोरोनल मास इंजेक्शन, फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर आदि के बारे में पता लगाएगा. इसका खास मकसद सोलर स्टोंस और सोलर वेदर को लेकर है। क्योंकि आसमान में हमारे कई सेटेलाइट और ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम है, ऐसे में सूरज के मौसम को समझना जरूरी है, क्योंकि इससे हम अपने सैटेलाइट और ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम को बचा सकते हैं।

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पीएसएलवी रॉकेट से ही क्यों होगी लांचिंग

भारत अपने बड़े मिशन पीएसएलवी और जीएसएलवी रॉकेट से ही लांच करता है। इसका सबसे बड़ा कारण इनका सक्सेज रेट है। दोनों ही रॉकेट से लांच किए गए अधिकांश मिशन सफल रहे हैं. नासा की तुलना में देखें तो भारत के ये स्पेस मिशन कम बजट में प्लान किए गए हैं, डॉ. मिला मित्रा के मुताबिक भारत धरती की ऑर्बिट की मदद से मिशन को मंजिल तक पहुंचाता है, इससे लागत कम आती है और ईंधन भी कम लगता है, स्पेसक्राफ्ट को धरती तक पहुंचाने का काम पीएसएलवी बखूबी कर देता है।

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